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हाल ही में अमेरिका और वियतनाम के बीच व्यापार समझौता हुआ है। इस व्यापार समझौते से भारत कई सबक सीख सकता है। खासकर भारतीय निर्यातकों पर इसका गहरा असर हो सकता है। भारत, वियतनाम को निर्यात के मामले में प्रतिद्वंदी और क्षेत्रीय सहयोगी दोनों मानता है। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनीशिएटिव (जीटीआरआई) की रिपोर्ट में यह बताया गया है।
साल 2000 में हुए समझौते में अमेरिका ने वियतनाम को दी थीं कई छूट
रिपोर्ट में बताया गया है कि अमेरिका और वियतनाम में जब साल 2000 में व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर हुए थे, जिसके बाद वियतनाम के उत्पाद अमेरिका में सिर्फ 2 से 10 प्रतिशत टैरिफ पर आने लगे। अब ट्रंप प्रशासन ने नई डील में वियतनामी उत्पादों के अमेरिका में आने पर 20 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का फैसला किया है। अमेरिका के इस कदम से वियतनाम का निर्यात बुरी तरह से प्रभावित हो सकता है। जीटीआरआई ने कहा कि भारतीय निर्यातकों को भी इससे सबक लेना चाहिए।
नए समझौते से वियतनाम के निर्यात पर पड़ेगा विपरीत असर
साल 2000 में हुए व्यापार समझौते के बाद वियतनाम के उत्पादों की अमेरिका में आवक काफी बढ़ गई और एक समय जो वियतनाम का निर्यात सिर्फ 80 करोड़ डॉलर था, वह बढ़कर 135 अरब डॉलर हो गया। विशेषज्ञों का दावा है कि नए टैरिफ के बाद वियतनाम की यह बढ़त खत्म हो सकती है और इससे वियतनाम का निर्यात सेक्टर बुरी तरह से प्रभावित होगा। इतना ही नहीं वियतनाम होकर अमेरिका आने वाले चीनी सामान पर 40 प्रतिशत टैरिफ लगाने का फैसला किया गया है।
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विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका का यह कदम विश्व व्यापार संगठन के नियमों के खिलाफ है। जीटीआरआई ने कहा कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर बातचीत अंतिम चरण में है। ऐसे में भारत की तरफ से बातचीत कर रहे लोगों को सलाह है कि वे वियतनाम के अनुभव से सीखें और पुरानी छूट को वापस लेने, टैरिफ लगाने और सामान के उत्पादन की जगह को लेकर अस्पष्ट नियमों पर अमेरिका के साथ स्पष्ट बातचीत करें।






